Sheikh Chilli Ki Kahani शेखचिल्ली की कहानी

Sheikh Chilli Ki Kahani एक गांव में एक शेखचिल्ली नाम का लड़का रहता था। वह हमेशा बहुत बड़े बड़े ख्वाब देखता था। ख्वाबों में डूब जाना और ख्याल देखना जैसे उसकी आदत बन चुकी थी। उसकी मां उसे बहुत समझाती थी। वह कहती थी कि दिन रात ख्बाब देखने से कुछ नही होता, उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है, तभी जाकर सफलता हासिल होती है। एक दिन वह अपनी माँ का कहना मान कर तैयार होकर काम की तलाश में घर से निकल गया।

Sheikh Chilli Ki Kahani शेखचिल्ली की कहानी – Shekh Chilli Ke Karname

Sheikh Chilli Ki Kahani

शेखचिल्ली की कहानी

Shekh chilli ke karname Aur Shekh chilli ke chutkule :-

  • Sheikh Chilli Ki Kahani – शेख चिल्ली कामचोर नहीं था पर वह कुछ काम करने पर अपनी सपनों की दुनिया में खो जाता था। इस कारण उसका काम नहीं हो पाता था। जब वह अपने घर के थोड़ी दूर आया और सोचने लगा कि आख़िर वह क्या काम करें, जिससे वह खूब पैसा कमा सके।
  • तभी उसने एक पेड़ के नीचे एक व्यापारी को बैठे हुए देखा। उसके पास एक बड़ी सी टोक़री थी और उसमें बहुत सारे अंडे रखे हुए थे, तो शेखचिल्ली ने उस व्यापारी से  पूछा- कि आप यहाँ बैठकर किसका इंतेजार कर रहे है, क्या में आपकी कुछ मदद कर सकता हूँ। 
  • उसके बाद व्यापारी ने कहा- ‘ दरअसल मुझे यह टोकरी लेकर मेरे को गांव जाना है अगर कोई मेरी मदद कर दे तो इसमें से चार अंडे में उस व्यक्ति को दे दूंगा’. इस पर शेख चिल्ली ने उत्तर दिया कि – ‘ में आपका काम कर दूंगा, पर मुझे इसके बदले छह अंडे चाहिए’. फिर व्यापारी ने कहा कि- ‘ नही भाई! मैं छह अंडे नहीं दे सकता मैं ज्यादा से ज्यादा फिर पाँच अंडे की दे पाऊंगा पर शर्त यह है कि अंडे सही सलामत मेरे घर तक पहुंच जाएं’. शेखचिल्ली ने व्यापारी की बात मान ली और कहा कि-  ‘आप आगे आगे चलिए में इस टोक़री को लेकर आपके पीछे पीछे चलता हूं’.
  • शेख चिल्ली मन ही मन बहुत खुश हो गया. कुछ दूर चलते ही, शेखचिल्ली पर अपने ख्यालों में खो गया. मैं मन ही मन हो गया और अपने आप से बातें करने लगा। वह कहने लगा कि- ‘ इन चार अंडों में से चार बच्चे निकलेंगे और वह बड़े होकर ओर अंडे देंगे, कुछ अंडे में बाजार में बेच दूंगा और बचे हुए अंडों में से ओर बच्चे निकलेंगे’ ऐसे में बार-बार करूंगा और अंडों का व्यापार करूंगा, फिर में मुर्गिया बेचकर और पैसे कमाऊंगा. उसके बाद में उन पैसों से गाय-भैसे खरीद लूंगा और दूध-दही का व्यापार करूंगा. ऐसा करकर में अमीर बन जाऊँगा और बड़ा सा बंगला लूंगा. इस करने के बाद में नोकर रखूँगा, जो माँ और बाबा और मेरी सेवा करेंगे.
  • ऐसे ख्याली पुलाव पकाते-पकाते, शेखचिल्ली ने अपनी गर्दन जोर जोर से हिला दी और नेपाली के सारे अंडे गिरा दिए. फिर व्यापारी ने शेख चिल्ली पर बहुत चिल्लाया और उसे मारने लगा। ऐसे पर शेख चिल्ली वहा से भाग निकला और उस दिन उसने यह ठान लिया कि वह कभी ख्यालों की दुनिया मे नही खोएगा और अपने सपनों को असलियत में पाने की पूरी कोशिश करेगा.

 

Note : Sheikh Chilli Ki Kahani

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